सीतामढी़, बिहार। रीगा चीनी मिल चालू हो तथा तीन कृषि कानून रद्द हो।

सीतामढी़, बिहार।
रीगा चीनी मिल चालू हो तथा तीन कृषि कानून रद्द हो।

(मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट)

सीतामढ़ी रीगा प्रखंड पर धरना प्रदर्शन।
एआईकेएससीसी के बैनर तले जिले के रीगा प्रखंड मुख्यालय पर भारी ठंढ के बावजूद बडी संख्या मे किसान -मजदूरों ने धरना तथा प्रदर्शन किया।
रीगा चीनी मिल बंद होने तथा तीन काला कृषि कानून रद्द नही करने तथा एम एसपी को कानूनी दर्जा नही मिलने से आक्रोशित किसानों ने रीगा चीनी मिल चालू करो,गन्ने की लूट बंद हो,सभी तौल केंद्र चालू हो,गन्ना का मूल्य 6सौ रु क्वि.तय हो बकाये गन्ना मूल्य तथा के सी सी के140करोड़ रु.केभुगतान की सरकार गारंटी करे,किसान विरोधी तीनो कृषि कानून रद्द हो तथा एम एसपी(सीटू+50%) को कानूनी दर्जा देकर उसका लाभ 100% किसानों को देने की गारंटी हो की मांग को लेकर रीगा प्रखंड मुख्यालय पर किसानों ने जमकर नारेबाजी की।कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष पारसनाथ सिंह ने की।मौके पर तीनो कानून रद्द करने को हस्तक्षेप करने हेतू राष्ट्रपति के नाम तथा स्थानीय समस्याओं पर प्रखंड अधिकारी को दो मांग पत्र सौंपा गया।
धरना स्थल पर हीं सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मिल के सीएमडी द्वारा मिल बंद करने की वर्षों से चल रही साजिश पर राज्य सरकार की नाकामी से रीगा चीनी मिल बंद हुआ सरकार अविलंब रीगा थाना में दर्ज मामले मे तथा जनहित का मामला दर्ज कराकर ओ पी धानुका को गिरफ्तार करे तथा कुशल सीएमडी बहाल कर मिल को चालू कराये,सभी किसान तथा कामगार सहयोग को तैयार है।
तीन कृषि कानून तथा एम एसपी पर नौवें राउंड की वार्ता विफल होने पर केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि सरकार 65%आवादी के जीवन से खिलवाड़ कर 100%किसानों को एम एसपी का लाभ नही देना चाहती है।कान्ट्रेक्ट खेती का खेल तो रीगा सुगर कं हीं दिखा रही है।आवश्यक बस्तु पर सीमा खत्म करने से उपभोक्ता के साथ किसानों का दो-दो बार शोषण होगा।वन नेशन वन मार्केट से किसान मजदूर बन जायेंगें तथा कारपोरेट मालोमाल होगा।पूरे देश मे पिछले कई वर्षो से कारपोरेट का बन रहा साईलो इसका प्रमाण है।
धरना स्थल से किसानों ने रीगा चीनी मिल चालू करने की मांग को लेकर एक विशाल प्रदर्शन मिल गेट तक निकाला तथा रीगा मिल चौक जामकर सभा किया तथा राज्य सरकार से मिल चालू कराने की मांग की।
सरकार किसानों के धैर्य की परीक्षा न ले।पूरे देश मे बढता किसानों का गुस्सा भयंकर रूप न ले-ले इससे पूर्व हीं प्रधानमंत्री जी को आन्दोलन की मांग को मान लेना चाहिए।
सभा को मोर्चा के संरक्षक डा आनन्द किशोर,जलंधर यदुबंशी,शफीक खान किसान नेता राज किशोर सिंह,संजीव कुमार सिंह,मनोज कुमार,सुरेश बैठा,बेलसंड से ठाकुर धर्मेन्द्र सिंह, राजेश कुमार सिंह,अनूठा लाल पंडित,विजय कुमार सिंह,हरिओमशरण नारायण,आलोक कुमार सिंह,कौशल किशोर सिंह,जिलापार्षद चन्द्रजीत यादव,ओम प्रकाश कुशवाहा, आफताब अंजुम,कुलदीप यादव,कर्पूरी जी ,रामाशंकर सिंह,डा रबीन्द्र कुमार सिंह,श्री कृष्ण सिंह, चन्देश्वर चौधरी,मुखिया राजकिशोर सिंह,रामजनम गिरी,अरबिन्द कुमार,मदन कुशवाहा, विनय कुशवाहा,मोहन राम,बीरेंद्र यादव,रामपुकार साह,सन्नी श्री बास्तव,राकेश कुमार सिंह,अशोक निराला,हंसराज दास सहित अन्य नेताओं ने किसानों के आन्दोलन को तेज करने का ऐलान किया।
सभा के अंत मे दिल्ली किसान आन्दोलन के 90अमर शहीद किसानों तथा समाजवादी विचारों से जुडे रहे कमल मोरारका जी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।